वाद- विवाद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

गाजीपुर । राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर में शनिवार को वाद -विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका विषय था -सरकारी शिक्षा व्यवस्था बनाम प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था । सरकारी शिक्षा के पक्ष में 12 छात्राओं ने तथा प्राइवेट शिक्षा के पक्ष में 06 छात्राओं ने अपनी बात रखी। भारत की नीति मिश्रित है। यहां सरकारी और प्राइवेट दोनों शिक्षा व्यवस्था मान्य और चलन में है। भारत की शिक्षा व्यवस्था विविधतापूर्ण और बहुपरतीय है। यह बटी हुई और बहुपरतीय शिक्षा व्यवस्था देश की एकता और अखंडता के लिए ठीक नहीं है। सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों की असफलता की परिचायक है बढ़ती हुई प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था। शिक्षा सेवा का विषय है लेकिन वह आज मुनाफे का व्यवसाय है। सरकारी शिक्षा अपनी अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के कारण वेंटिलेटर पर जा चुकी है। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा क्षेत्र शिक्षा व्यवस्था है। परिचर से लेकर आला अधिकारी तक इसमें लिप्त हैं। यदि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से इसे दूर कर दिया जाए तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं होगा। प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था की चमक और स्टेटस के पीछे एक अघोषित एक कड़ी प्रतियोगिता है।सरकारी शिक्षा व्यवस्था गरीबों के लिए हितकारी है तो वहीं प्राइवेट शिक्षा पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा देने वाली है l ऐसी कई बातों पर छात्राओं के बीच जबरदस्त बहस हुई। प्रत्येक छात्रा को 05 मिनट का समय दिया गया। 05 मिनट के बाद उपस्थित छात्राओं के पूछे गए क्रास प्रश्नों का उत्तर जिन बच्चों ने समुचित ढंग से उत्तर दिया उसका मूल्यांकन क्रमशः अभिव्यक्ति,तथ्य,उदाहरण और प्रश्नोत्तरी के आधार पर विजेता छात्राओं का चयन किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर संध्या राजभर एम ए द्वितीय सेमेस्टर; द्वितीय स्थान पर अंजलि एम ए द्वितीय सेमेस्टर तथा तृतीय स्थान पर प्रज्ञा वर्मा, बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर रही। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. मनीष सोनकर और सुश्री ओम शिवानी रही। कार्यक्रम का संयोजन डॉ निरंजन कुमार यादव, डॉ रामनाथ केसरवानी एवं डॉ ओम शिवानी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी डॉ.शिव कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन से छात्राओं के चिंतन और उनकी देश के प्रति अपनी भागीदारी का परिचय मिलता है।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में प्रज्ञा वर्मा, मानसी अग्रवाल, संध्या राजभर, वंशिका सिंह, खुशबु, अंजलि वर्मा, लक्ष्मी राय, पूनम आदि छात्राओं ने अपनी बात बहुत मजबूती के साथ रखी। वहीं प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में रीतू यादव, प्रीति राय, राजश्री मोदनवाल, एवं महक ने तार्किक ढंग से अपनी बात रखी।


