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गाजीपुर जनपद में विश्वविद्यालय की आवश्यकता – प्रो. वी के राय, प्राचार्य

 

गाजीपुर । जनपद में एक राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए, यह प्रस्ताव- आवश्यकता कहें या मांग पुरानी हो चुकी है। अज्ञात कारणों से यह मांग प्रदेश व केंद्र सरकारों के लिए वायबल नहीं हो पाई।आप को स्मरण हो तो जनपद के छात्रों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन ने जनपद में एक विश्वविद्यालय की मांग को लेकर जन – जन को मथ दिया था। छात्रों ने आमरण अनशन किया, जेल गए, आश्वाशन दिए गए…. पर परिणाम कुछ नहीं. शैक्षिक संगठनों ने पूर्व शिक्षा मंत्री  महेंद्र पांडेय को ज्ञापन दिया, केंद्रीय राजनीति में भारी-भरकम रसूख रखने वाले तत्कालीन रेलराज्य मंत्री  मनोज सिन्हा  तथा  महेंद्र नाथ पांडेय  से गुहार लगाई, पर परिणाम वही ढाक के तीन पात। समीपवर्ती जनपद – बलिया और आज़मगढ़ में विश्वविद्यालय खुले पर गाजीपुर जनपद से हमारे नेताओं की बेरुखी जस की तस रही।अब प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी  ने हर जिले में विश्वविद्यालय खोले जाने की घोषणा की है तो जनपद के प्रबुद्ध वर्ग को वर्षों पुरानी इस मांग के पूरी होने की उम्मीद बनी है. गाजीपुर में वैसे भी 300 से अधिक महाविद्यालय हैं और 100 किमी दूर स्थित पूर्वांचल विश्वविद्यालय मुख्यालय से जनपद के उच्च शिक्षा केंद्र संभाले नहीं संभल रहे हैं। न प्रवेश, न परीक्षा, न पाठ्यक्रम या शिक्षण न ही परीक्षा परिणाम ।पिछले कई सालों से किसी भी सत्र की सारी कक्षाओं का त्रुटि रहित परीक्षाफल नहीं निकला है।प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री  से अनुरोध है कि स्वामी सहजानन्द सरस्वती की पुण्य भूमि पर उनके नाम पर एक केंद्रीय विश्वविद्यालय- यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड एग्रीकल्चर – स्थापित हो, इस बात से शायद ही कोई जनपदवासी सहमत नही होगा। जनपद के विधायकगण डॉ. संगीता बलवंत (पूर्व), डॉ. वीरेंद्र यादव तथा सुहैब अंसारी द्वारा उ.प्र. विधान सभा मे मजबूती से विश्वविद्यालय की मांग की जा चुकी है।मुख्यमंत्री की घोषणा के मूर्तरूप लेने से जनपद की बौद्धिक संपदा में चार चांद लग जाएंगे।