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गंवई गुलिस्तां का गुलाब पुस्तक परिचर्चा सम्पन्न

गाजीपुर । भाषा की सहजता और स्पष्टता रामबदन राय के साहित्य की महत्वपूर्ण विशेषता है। वह एक कालजयी रचनाकार हैं जिन्होंने काव्य, कथा, व्यंग्य सहित विभिन्न विधाओं में स्तरीय लेखन किया है। उक्त उद्गार रविवार  को जनपद के जोगामुसहिब गांव में आयोजित “गंवई गुलिस्तां का गुलाब” पुस्तक के लोकार्पण तथा परिचर्चा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. मान्धाता राय ने व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि कश्यप कीर्ति रामबदन राय की अक्षय कीर्ति का आधार है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. द्वारिका नाथ राय ने फिरकी वाली की प्रो. राय को मास्टर पीस बताते हुए इसे दलित विमर्श का महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। माधव कृष्ण ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में रामबदन राय को आधुनिक कवीर की संज्ञा से विभूषित किया।प्रख्यात लेखक तथा विचारक  रामावतार ने अपने उद्बोधन में कहा कि ग्राम्य जीवन साहित्य सृजन के लिए उपयुक्त आधार भूमि तैयार करती है जिसका बखुबी इस्तेमाल रामबदन राय ने किया है ।कवि दिनेश चंद्र शर्मा तथा मोती प्रधान ने अपने मार्मिक काव्यमय प्रस्तुति से संगोष्ठी को सरसता प्रदान की ।कार्यक्रम में श्री रामावतार, डॉ. व्यास मुनि राय, सुहेल खान,  राम राय, अशोक गुप्ता, शेषनाथ राय, डॉ. सतीश राय, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. राकेश पाण्डेय आदि ने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत मे स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज, गाजीपुर के प्राचार्य प्रो. वी के राय ने आगंतुक अतिथियों तथा मीडिया कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रो. अजय राय ने किया।